घूँघट
इज़्ज़त के नाम पर बाँध दी जाती है बेड़ियाँ
बिना इजाज़त के नही रख सकती दहलीज़ के बाहर एड़ियाँ
घूँघट में रहकर भी चढ़ना चाहती है कामयाबी की सीढ़ियाँ
लेकिन बदनसीबी तो देखो घूँघट के अंदर लुप्त हो जाती है ना जाने कितनी पीढ़ियाँ
जीती है जीवन ऐसा,जैसे हो कोई घर सजाने वाली गुड़िया
उड़ना चाहती है वो भी पंख फेला कर जैसे उड़ती है चिड़ियाँ
घूँघट छुपा लेता है औरत की ना जाने कितनी ख़ूबियाँ
घूँघट की घुटन को लपेटे हुए भी ना जाने कहा से निकल जाती है औरत में इतनी कमियाँ।
~~LataChoudhary

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#samepinch