खोता हुआ बचपन
याद आता है वो बचपन
दिखाते थे जब हम लड़कपन
खाते थे इमली लेकर चटकारे
अनमोल थे पल बहुत सारे
खेलते गुडी-गुड़िया के खेल पुराने थे
वो भी क्या अलग ज़माने थे
रात में जब नानी सुनाती प्यारी-प्यारी कहानी थी
याद जो हमको होती मुँह ज़ुबानी थी
खो गयी वो कहानियाँ खो गया वो बचपन
जाने कहा गया वो हठपन
आज इंटेरनेट पर देखी जाती वही कहानी है
आज के ज़माने की रीत है ,भैया सबको ये निभानी है
आज ख़ीलोनो की जगह फोन ने लेली
आज इंटेरनेट पर बनते है सखी-सहेली
घर के हर सदस्य के साथ बिताते थे पल
बच्चों को फ़ोन से ही फ़ुर्सत नही मिलती आज कल
~~Latachoudhary
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